"याद-ए-आसिफा" कार्यक्रम में शिक्षाविदों और समाज की विशिष्ट हस्तियों का सम्मान, प्रो. आसिफा ज़मानी के नाम पर ऑडिटोरियम नामित करने पर विचार
लखनऊ, 22 जून।
पद्मश्री (प्रोफेसर एमेरिटस) स्वर्गीय प्रोफेसर आसिफा ज़मानी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर निशातगंज स्थित होटल सफायर बैंक्वेट मेट्रो सिटी में आयोजित "याद-ए-आसिफा" (श्रद्धांजलि, स्मृति व्याख्यान एवं सम्मान समारोह) भावनाओं, स्मृतियों और सम्मान का एक यादगार संगम बन गया। शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, प्रशासन, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर प्रोफेसर आसिफा ज़मानी की शैक्षिक, साहित्यिक और सामाजिक सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. आसिफ ज़मां रिज़वी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिज़वी ने की, जबकि संचालन डॉ. मसीहुद्दीन खान ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वर्तमान राज्यसभा सदस्य प्रो. डॉ. दिनेश शर्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ हाफिज मोहम्मद अशरफ रज़ा खान द्वारा पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ। स्वागत भाषण में अफशां आसिफ रिज़वी ने कहा कि प्रो. आसिफा ज़मानी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं, मूल्य और सांस्कृतिक विरासत आज भी समाज को दिशा दे रही हैं।
डॉ. आसिफ ज़मां रिज़वी ने अपनी माता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर शिक्षा में गुणवत्ता, अनुशासन और उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी भावनात्मक कविता "अम्मी... बहुत याद आती हो" प्रस्तुत की, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. इशरत नाहिद ने "प्रोफेसर एमेरिटस आसिफा ज़मानी : जीवन और सेवाएं" विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रो. ज़मानी केवल फारसी भाषा एवं साहित्य की अध्यापिका नहीं थीं, बल्कि स्वयं में एक संपूर्ण शैक्षणिक संस्था थीं। उन्होंने फारसी भाषा, शोध, अध्यापन और लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके द्वारा लिखी गई 30 से अधिक पुस्तकों तथा अनेक शोधपत्रों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि नय्यर उमर ने काव्यात्मक श्रद्धांजलि प्रस्तुत की, जबकि डॉ. मसीहुद्दीन खान और डॉ. एहतेशाम खान ने उनके व्यक्तित्व, सादगी, मानवता और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण को याद किया।
इस अवसर पर पहली बार स्थापित "आसिफा ज़मानी फख्र-ए-तालीम अवार्ड" वरिष्ठ शिक्षाविद एवं शैक्षिक प्रशासक ज़किया माजिद सिद्दीकी को प्रदान किया गया। उन्होंने सम्मान ग्रहण करते हुए कहा कि प्रो. आसिफा ज़मानी ज्ञान, आध्यात्मिकता, मानवीय मूल्यों और शैक्षिक उत्कृष्टता का अद्भुत संगम थीं।
इसके अलावा "आसिफा ज़मानी फख्र-ए-फारसी अवार्ड" लखनऊ विश्वविद्यालय के एम.ए. (फारसी) परीक्षा 2024-25 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शबाब हैदर नकवी को प्रदान किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रो. आसिफा ज़मानी ने ऐसे समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं, जब मुस्लिम महिलाओं के लिए अवसर सीमित थे। उनका जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
दरगाह हजरत शेख सलीम चिश्ती, फतेहपुर सीकरी के सज्जादा नशीन अरशद फरीदी चिश्ती ने प्रो. आसिफा ज़मानी के नाम पर "प्रोफेसर आसिफा ज़मानी चेयर" स्थापित करने की मांग की, ताकि उनकी शैक्षिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिज़वी ने कहा कि प्रो. आसिफा ज़मानी ज्ञान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों की प्रतीक थीं। फारसी भाषा और साहित्य के विकास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम में यह भी सुझाव दिया गया कि उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के ऑडिटोरियम का नाम प्रोफेसर आसिफा ज़मानी के नाम पर रखा जाए, जिस पर गंभीरता से विचार किए जाने की बात कही गई।
धन्यवाद ज्ञापन उनकी पौत्रियों आलिया रिज़वी और अलीना रिज़वी ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, साहित्यकार, कवि, बुद्धिजीवी, चिकित्सक, अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि, छात्र, पत्रकार तथा रिज़वी परिवार के शुभचिंतक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
— डॉ. आसिफ ज़मां रिज़वी