राम मंदिर दान विवाद पर बोले डिप्टी सीएम केशव मौर्य, कहा- चंपत राय पूजनीय, दोषी मिला तो नहीं बचेगा कोई
गुरु जी की कलम से
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान में कथित गबन और अनियमितताओं को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा बयान दिया है। झांसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पूजनीय व्यक्तित्व हैं और उनके खिलाफ बिना प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चंपत राय वर्षों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और करोड़ों रामभक्तों के बीच उनका विशेष सम्मान है। उन्होंने कहा कि समाज में उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए उन पर अनावश्यक और आधारहीन आरोप लगाना सही नहीं माना जा सकता।
दोषी मिला तो होगी कठोर कार्रवाई
दान राशि में कथित हेराफेरी और गबन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केशव मौर्य ने स्पष्ट कहा कि भगवान श्रीराम और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है। सरकार की मंशा साफ है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
डिप्टी सीएम ने इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जनता से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए वह राम मंदिर जैसे आस्था के विषयों पर भ्रम फैलाने की राजनीति कर रहा है।
उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें तथ्यों के आधार पर राजनीति करनी चाहिए और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए।
SIT जांच के बाद गरमाई सियासत
गौरतलब है कि राम मंदिर में प्राप्त दान राशि में कथित गबन और अनियमितताओं के आरोपों की जांच को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मामले में जांच की मांग और आरोप-प्रत्यारोप के बीच विशेष जांच दल (SIT) के गठन की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
विपक्ष जहां मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। ऐसे में राम मंदिर दान विवाद आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है।