बढ़नी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव का इंतजार, क्या थम जाएगी विकास की रफ्तार?
गुरुजी की कलम से
माननीय सांसद जगदम्बिका पाल और माननीय मंत्री अश्वनी वैष्णव की घोषणाओं के बावजूद बढ़नी रेलवे स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव अब तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में क्षेत्रीय जनता के बीच नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्र बढ़नी के लोगों का कहना है कि केवल घोषणाएं करने से विकास नहीं होता, बल्कि उन घोषणाओं को धरातल पर लागू करना भी जरूरी है।
सिद्धार्थनगर जनपद के बढ़नी रेलवे स्टेशन को नेपाल सीमा से सटे महत्वपूर्ण स्टेशन के रूप में देखा जाता है। यहां से बड़ी संख्या में यात्री देश के विभिन्न राज्यों और महानगरों की यात्रा करते हैं। बावजूद इसके कई सुपरफास्ट और लंबी दूरी की ट्रेनें स्टेशन से गुजर तो जाती हैं, लेकिन उनका ठहराव नहीं होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पूर्व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के लेटर पैड पर कटिहार–चंपारण हमसफर एक्सप्रेस के बढ़नी स्टेशन पर ठहराव की मंजूरी का उल्लेख किया गया था। इसके बाद सांसद जगदंबिका पाल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी यह जानकारी साझा की गई कि रेलवे बोर्ड ने ट्रेन के ठहराव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कटिहार–चंपारण हमसफर एक्सप्रेस का ठहराव शुरू नहीं हो सका।
अब क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि अमृत भारत एक्सप्रेस तथा न्यू जलपाईगुड़ी–अमृतसर एक्सप्रेस को सिद्धार्थनगर होते हुए बढ़नी मार्ग से संचालित किया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पहले से घोषित ट्रेन का ठहराव ही लागू नहीं हो पाया, तो नई घोषणाओं पर भरोसा करना मुश्किल होता जा रहा है।
व्यापारियों, छात्रों और यात्रियों का कहना है कि रेलवे सुविधाओं की कमी का असर क्षेत्र के विकास पर भी पड़ सकता है। बढ़नी जैसे सीमावर्ती कस्बे में बेहतर रेल कनेक्टिविटी न केवल यात्रियों के लिए जरूरी है, बल्कि व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्थानीय नागरिकों ने एक बार फिर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सांसद जगदंबिका पाल से मांग की है कि बढ़नी रेलवे स्टेशन पर घोषित ट्रेनों का वास्तविक ठहराव जल्द सुनिश्चित कराया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर रेल सुविधा मिल सके और विकास की रफ्तार थमने न पाए।