लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति, भारत-चीन समझौते पर उठाए सवाल


गुरुजी की कलम से

काठमांडू/नई दिल्ली: लिपुलेख दर्रा के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने को लेकर भारत और चीन के बीच हुए समझौते पर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई है। नेपाल सरकार ने इस मुद्दे पर दोनों देशों को कूटनीतिक नोट भेजकर स्पष्ट किया है कि लिपुलेख उसकी संप्रभु भूमि का हिस्सा है और इस मार्ग से किसी भी प्रकार का आवागमन या समझौता नेपाल को शामिल किए बिना न्यायसंगत नहीं है।
नेपाल के नेपाल विदेश मंत्रालय ने रविवार को पहली बार इस विषय पर अपनी आधिकारिक धारणा सार्वजनिक की। मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल ने बताया कि नेपाल ने अपनी स्थिति से भारत और चीन दोनों सरकारों को अवगत करा दिया है।
उधर, भारत और चीन ने वर्ष 2026 के लिए लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा को औपचारिक रूप से शुरू करने की घोषणा कर दी है। भारत सरकार ने चीन सरकार के साथ समन्वय में जारी विज्ञप्ति में बताया कि यह यात्रा जून से अगस्त के बीच संचालित की जाएगी।
गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के कारण पिछले लगभग छह वर्षों से यह यात्रा और सीमावर्ती व्यापार बंद था, जिसे अब पुनः खोलने का निर्णय लिया गया है।
नेपाल के इस विरोध से क्षेत्रीय कूटनीति में नई हलचल पैदा हो गई है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर त्रिपक्षीय संवाद की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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