जब मगध नरेश घनानंद ने आचार्य चाणक को अपमानित किया था

1 जूनअंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण दिवसमहान दार्शनिकरणनीतिकारशिक्षक आचार्यचाणक्य के जन्म के उपलक्ष में मनाया जाता हैइस दिनब्राह्मण समुदायके ज्ञानसमाज कल्याण में उनके योगदानऔर सनातन धर्म की रक्षा मेंउनके द्वारा किए गए प्रयासोंकी याददाश्त में मनाया जाता है
      गुरुजी की कलम से 

जब मगध नरेश घनानंद ने आचार्य चाणक को अपमानित किया था
आचार्य चाणक्य बहुत बुद्धिमानचतुर दूरदर्शी और दृढ़ निश्चायी व्यक्तित्व के धनी थे वह अर्थशास्त्र राजनीति के साथ ही साथ कूटनीति के महान विद्वान थेएक बार मगर नरेश घनानंदने पुष्पपूर्व पाटिल पुत्र में एक विशाल दान समारोह का आयोजन कियाआचार्य चाणक उसे सभा में पहुंचेघनानंद चाणक्य पहनावे और रंग रूप को देखकरउनकी वेशभूषा का उपवास उठाते हुए उन्हें अपमानित किया और सैनिकों से उन्हें छोटी से घर सेटकर आयोजन स्थल से बाहरभेजने का आदेश दे दियायही नहीं कहा जाता हैकि उन्हेंजेल में डालने का भी आदेश दे दिया थाघनानंद की वाणी सुनते हीआचार्य चाणक्यइस घटना से बहुत ही अपने आप को अपमानित महसूस कियाइस अपमान से आहत होकर उन्होंने लंबे समय से रखी हुई शिखा चोटी का जो उसे समयविद्वानों की पहचान माना जाता था उसे खोलते हुएएक कहा किआज से मैं अपने बालों पर तेल नहीं लगाऊंगा ना ही अपने शिखा को बंदूंगा जब तक इस राजा को प्रदर्शित नहीं कर दूंगाअपनेउद्देश्य की प्राप्ति के लिएउन्होंने पुरुषों एवं महिलाओं को प्रशिक्षित करजासूसी का एकमजबूत नेटवर्क बनाया
उन्होंने बसंती नाम की एक लड़की कोअत्यंत कुशल गुप्तचर के रूप में प्रशिक्षित कर दिया अपनी योजना अनुसार बसंती को गुप्त रास्ते से माय महल में प्रवेश कर दियाजहां वह मुख्य रसोई से का बन गईकहा जाता है कि उसनेरसोई मेंबिस्मिल्लाह भोज देकरभोजन में विश्व मिलकर केलोगों को खाने के लिए परोस दियाजिसके कारणरानी और राजकुमारियांचीन निद्रा में सो गईउसने एक जहरीले सांप की मदद सेघनानंद को भी मौत के घाट पहुंचा दियाचाणक्य नेएक साधारण बालक चंद्रगुप्त से मिलकरघनानंद केसाम्राज्य को समाप्त करमौर्य साम्राज्य की स्थापना कियाथा

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