वीर अब्दुल हमीद स्मारक की बदहाली देख भड़के लेखक शाह आलम राना, खुद की सफाई

सद्दाम हुसैन 

भरथना (इटावा)। 1965 के भारत-पाक युद्ध के महानायक और परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा की बदहाल स्थिति देखकर क्रांतिकारी लेखक एवं चम्बल मिशन अभियान के संयोजक डॉ. शाह आलम राना दंग रह गए। भरथना कस्बे के इटावा चौराहे पर स्थापित स्मारक स्थल पर पहुंचकर उन्होंने प्रशासनिक उपेक्षा पर नाराजगी जताई और साथियों के साथ मिलकर प्रतिमा स्थल की सफाई की।
चम्बल मिशन अभियान के तहत यात्रा कर रहे डॉ. शाह आलम राना अपने सहयोगी सुनील कुमार और नरेंद्र त्रिपाठी के साथ भरथना से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर पड़ी, जो पोस्टरों और पर्चों से ढकी हुई थी। प्रतिमा स्थल पर कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि यह प्रतिमा किसकी है। साथ ही स्मारक स्थल का रंग-रोगन भी लंबे समय से नहीं कराया गया था।
प्रतिमा की दुर्दशा देखकर डॉ. शाह आलम राना और उनकी टीम ने स्वयं आगे बढ़कर स्मारक स्थल की सफाई की तथा प्रतिमा पर चिपके पोस्टर और पर्चों को हटाया। उन्होंने कहा कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले नायकों के स्मारकों की ऐसी स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे महापुरुषों और शहीदों की स्मृतियों को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाए रखें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपने वीरों के इतिहास से परिचित कराना जरूरी है और इसके लिए स्मारकों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि प्रशासन द्वारा स्मारक की देखरेख और सौंदर्यीकरण नहीं कराया गया, तो अगली बार उनकी टीम स्वयं तैयारी के साथ आएगी और स्मारक का स्वरूप बदलने का कार्य करेगी।

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