इटावा में 1857 के गुमनाम वीरों को सम्मान दिलाने की मांग तेज, “चंबल शौर्य स्मारक” बनाने की उठी आवाज




सद्दाम हुसैन 

इटावा।

चंबल फाउंडेशन द्वारा संचालित “चंबल मिशन” अभियान के तहत 1857 की क्रांति के उपेक्षित वीरों — जीता चमार, जंगली-मंगली मेहतर और मारून सिंह लोधी — को इतिहास में उचित सम्मान दिलाने की मांग तेज हो गई है। अभियान के माध्यम से चंबल अंचल के गांव-गांव में जनचौपाल आयोजित कर लोगों को इन गुमनाम क्रांतिकारियों के संघर्ष, बलिदान और शौर्यगाथा से परिचित कराया जा रहा है।


चंबल मिशन से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले इन वीरों के योगदान को आज तक इतिहास में वह स्थान नहीं मिल सका, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। जनचौपालों में लोकगीतों और ऐतिहासिक प्रसंगों के जरिए नई पीढ़ी को इन क्रांतिनायकों के साहस और बलिदान की जानकारी दी जा रही है।


अभियान के दौरान “चंबल शौर्य स्मारक” निर्माण की मांग प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। प्रस्तावित स्मारक में क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं स्थापित करने, पुस्तकालय एवं ऑडिटोरियम निर्माण, लाइट एंड साउंड शो, ‘चंबल गाथा’ डॉक्यूमेंट्री, डाक टिकट जारी कराने तथा विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। साथ ही इन वीरों के जीवन संघर्ष को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की भी मांग की जा रही है।

चंबल परिवार के सदस्यों का कहना है कि क्षेत्र के वीरों के इतिहास और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से जनचौपालों के माध्यम से हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें कागज और कपड़े दोनों पर लोगों से समर्थन लिया जा रहा है। अभियान को ग्रामीणों और युवाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

चौरेला, हुकुमपुरा, बेनीपुरा, बंसरी, रौरा का पुरा, लुहिया खुर्द, रेलवे कॉलोनी, रमी का वर, बहादुरपुर लोहिया, भीखेपुर, बाबरपुर, शेरपुर कोठी, जगम्मनपुर, गढ़िया मुलू सिंह, राजपुर, अयारा, झम्मनपुर, बादरीपूठ, बनकटी खुर्द, शिवराजपुर और हरनाथपुर सहित कई गांवों में जनसंपर्क और जनचौपाल कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अभियान के समापन के बाद जनसमर्थन से तैयार ज्ञापन सरकार को सौंपा जाएगा।

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