लखनऊ विश्वविद्यालय में इरशाद राही के अफसाना-संग्रह “ख़ला” का भव्य लोकार्पण
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में प्रसिद्ध लेखक इरशाद राही के नए उर्दू अफसाना-संग्रह “ख़ला” का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षक, साहित्यकार, पत्रकार और शहर की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। आयोजन रूबरू फाउंडेशन की ओर से किया गया।
समारोह की अध्यक्षता उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अब्बास राजा नईर ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इरशाद राही ने डिजिटल युग और बदलते सामाजिक परिवेश की जटिलताओं को अपने अफसानों में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने “ख़ला” को खामोशी, अत्याचार, अकेलेपन और इंसानी खोखलेपन के खिलाफ एक सशक्त साहित्यिक हस्तक्षेप बताया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कोऑर्डिनेटर डॉ. मसीह उद्दीन खान ने कहा कि वर्तमान दौर में साहित्यकारों के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनका इरशाद राही मजबूती से सामना कर रहे हैं।
मुख्य अतिथि आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मंज़ूर अहमद ने कहा कि “ख़ला” केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि अपने समय की संवेदनाओं, पीड़ा और उम्मीदों का सजीव दस्तावेज है। विशिष्ट अतिथि अर्जुन देव भारती ने भी लेखक को शुभकामनाएं दीं।
डॉ. रेशमा परवीन ने कहा कि यह पुस्तक उन लोगों की कहानी कहती है जो बाहर से मजबूत दिखते हैं, लेकिन भीतर गहरे अकेलेपन और संघर्ष से गुजरते हैं। वहीं डॉ. जाँनिसार आलम ने पुस्तक में समाहित सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। आकाशवाणी लखनऊ की एंकर शाज़िया ने विश्वास जताया कि “ख़ला” पाठकों पर गहरी छाप छोड़ेगी।
कार्यक्रम में साद सिद्दीकी, सुहैल काकोरवी सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व रूबरू फाउंडेशन के पदाधिकारियों—मोहम्मद अज़हर हुसैन, इसरार अहमद, डॉ. तबस्सुम खान और रूही रहमान—ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया। साथ ही कहानी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया और लगभग 30 बच्चों को प्रमाणपत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
अंत में डॉ. मसीह उद्दीन खान ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम के सफल समापन की घोषणा की।