किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता है।

ज़मीरुलहक 
किसान, खाद और मेहनत – 
सुबह का सूरज अभी निकला भी नहीं है, लेकिन गाँव के खेतों में एक परछाई हल्की-सी झुककर कुदाल चला रही है। यह परछाई किसी और की नहीं, बल्कि उस किसान की है, जो हमारे लिए धरती से सोना उगाता है। उसकी हथेलियाँ छिल चुकी हैं, कपड़े पसीने और मिट्टी से भीगे हैं, लेकिन आँखों में बस एक ही सपना है—इस साल की फसल लहलहाती हो।
अच्छी फसल के लिए खाद जरूरी है, लेकिन यही खाद उसके लिए चिंता का कारण भी है।कभी कभी  समय पर मिलती नहीं,  फसल के साथ-साथ उसका मन भी सूखने लगता है। उसे पता है—अगर खाद सही न मिली, तो उसकी मेहनत बेकार हो जाएगी।
दिन-रात की मेहनत आसान नहीं। गर्मी की तपती दोपहर, बारिश की कीचड़, सर्दी की ठिठुरन—हर मौसम में किसान खेत में खड़ा रहता है। उसके कंधे पर सिर्फ हल नहीं, बल्कि पूरे परिवार का भविष्य टिका होता है। और जब कभी फसल खराब हो जाती है, तो वह सिर्फ अनाज नहीं खोता, बल्कि उम्मीद भी खो देता है।
हम और आप शहर में बैठकर थाली में रोटी खाते हैं, लेकिन उस रोटी के पीछे किसान की पसीने की बूंदें, टूटते सपने और कभी-कभी अधूरे अरमान भी होते हैं। किसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी मेहनत है, लेकिन अगर उसे समय पर सही खाद, पानी और उचित दाम मिल जाएं, तो उसका जीवन बदल सकता है।किसान की यह लड़ाई सिर्फ खेत की मिट्टी से नहीं, मौसम के थपेड़ों से भी है। अगर किसान खुशहाल होगा, तभी हमारी थालियाँ भरी रहेंगी, और तभी देश सच में समृद्ध होगा।
क्योंकि सच है—किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता है।

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