कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात, , कपिलवस्तु, नेपाल में इनाम वितरण समारोह सा कुशल संपन्न

बढ़नी सद्धार्थनगर
वह मुबारक कारवां जिसे जामिया सिराजुल उलूम अल्सलफियह झंडानगर कृष्णानगर नेपाल ने इखलास, हिम्मत और बुलंद मक़सद के साथ शुरू किया था, आज इल्म और तर्बियत की खुशबू के साथ नेपाल के कोने-कोने में अपनी रौशनी फैला चुका है।
इसी कारवां की एक पुरअसर, शानदार और काबिले फख्र शाख है कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात, चनरोटा, जो शिवराज नगर पालिका वार्ड नंबर 5 में है। यहां आज 220 से ज़्यादा बेटियां दीनी इल्म और अख्लाकी तालीम से निखर रही हैं।
यह तालीमी इदारा जामिया सिराजुल उलूम अल्सलफियह के ज़ेरे इंतिज़ाम बहुत ही मुनज़्ज़म, मज़बूत अंदाज़ में काम कर रहा है। यह सिर्फ एक मदरसा नहीं, बल्कि तहज़ीब, तालीम और तरबियत का रौशन मीनार है।
मौलाना शमीम अहमद नदवी की रहनुमाई में चनरोटा में तीन अहम मराकज़ संजीदगी से काम कर रहे हैं:
 मदरसा ज़ियाउल उलूम अल्सलफियह मदरसा उस्मान बिन अफ़्फान (हिफ्ज़ विभाग  लड़के और लड़कियों दोनों के लिए) कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात
ये तमाम मराकज़ तालीम के साथ-साथ सोच, किरदार और दीनी पहचान को मज़बूत करने का अहम ज़रिया हैं।
इन्हीं खुशगवार फज़ाओं में कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात में एक पुरवक़ार, दिलनशीं और हौसला अफ़ज़ा इनाम वितरण समारोह का आयोजनहुआ, जिसका मक़सद सिर्फ इनामात देना नहीं, बल्कि मेहनत करने वाली बेटियों को सराहना, उनमें दीनी जज़्बे को मज़बूत करना, और उन्हें एक फिक्रमंद, ज़िम्मेदार और बसीरत अफरोज़ खातून बनने की तरबियत देना था।
यह तकरीब उस वक्त मुनअकिद हुई जब हिफ्ज़-ए-अरबईन नववी मुकाबला कामयाबी से मुकम्मल हुआ। यह मुकाबला मौलाना वसीम अहमद मक्की की निगरानी में हुआ, जिसमें मुतवस्सिता, सानविया और आलिमात की चुनी हुई छात्राओं ने पुरजोश हिस्सा लिया। यह कोई मामूली मुक�

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