बढ़नी सिद्धार्थनगर में महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया ललही छठ पर्व
गुरुजी की कलम से
बढ़नी, सिद्धार्थनगर।
विकासखंड कार्यालय बढ़नी का परिसर गुरुवार को आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना रहा। नगर पंचायत बढ़नी सहित आसपास के गांवों से आई सैकड़ों महिलाएं यहां वट वृक्ष के नीचे बैठकर ललही छठ (हरछठ) की पूजा-अर्चना करती नजर आईं। पूजा के बाद महिलाएं परिसर में बने आकर्षक पार्क में विश्राम करतीं, आपसी बातचीत करतीं और धार्मिक माहौल का आनंद लेती रहीं। यह मनोहर दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
महिलाओं की इस आस्था के पीछे तत्कालीन विकासखंड अधिकारी सतीश सिंह की सोच और प्रयास को याद किया गया, जिनके कार्यकाल में परिसर का सुंदरीकरण और सुंदर पार्क का निर्माण कराया गया था।
त्योहार की तिथि और महत्व
इस वर्ष ललही छठ 14 अगस्त 2025, गुरुवार को मनाया गया। षष्ठी तिथि का आरंभ सुबह 4:23 बजे हुआ और समापन देर रात 2:07 बजे होगा। यह पर्व भगवान बलराम के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है। बलराम जी को हल और खेती का देवता माना गया है, इसलिए इस दिन कृषि संस्कृति, मातृत्व और संरक्षण का विशेष सम्मान किया जाता है। वैष्णव परंपरा, गृहस्थ स्त्रियां और कृषक परिवार विशेष रूप से इस व्रत का पालन करते हैं।
पूजा-व्रत की परंपरा
सुबह स्नान के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेकर घर की दीवार पर भैंस के गोबर से छठ माता, हल, सप्तऋषि, पशु और किसान के चित्र बनाती हैं।
कलश स्थापना, भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा, ज्वार और महुआ से भरे कुल्हड़, देवली-छेवली, सात अनाज (चना, जौ, गेहूं, धान, अरहर, मक्का, मूंग) और भुने चनों का भोग इस पूजा का प्रमुख हिस्सा है।
भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन और हल्दी से रंगे वस्त्र-आभूषण भगवान को अर्पित किए जाते हैं। पूजा के अंत में कथा और आरती के बाद महिलाएं महुआ के पत्तों पर महुआ फल और भैंस के दूध की दही का सेवन करती हैं।
यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि कृषि संस्कृति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में भी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।