नेपाल के कैसीनो बना रहे भारतीय युवाओं को नशेड़ी और कंगाल


परमात्मा प्रसाद उपाध्याय

भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल के विभिन्न शहरों में बने कैसीनो भारतीय युवाओं को शराब, शबाब, जुआ और नशीले पदार्थों का लुभावना जाल बिछाकर नशेड़ी और कंगाल बना रहे हैं। बढ़नी, रुपईडीहा, ककरहवा, अलीगढ़वा सहित कई सीमाई क्षेत्रों से सटे नेपाल के कस्बों में ऐसे कई कैसीनो खुले हैं जहां भारतीय युवक बड़ी संख्या में आकर्षित हो रहे हैं।

इन कैसीनो में अर्धनग्न युवतियां ग्राहकों को शराब, शबाब और जुए के लिए लुभाती हैं। लाखों रुपए खर्च कर भारतीय युवा अपना सब कुछ गंवा बैठते हैं। कई मामलों में लोग अपनी जमीन-जायदाद तक बेच चुके हैं और कंगाली की हालत में आ गए हैं। नेपाल के नागरिकों को इन कैसीनो में प्रवेश नहीं दिया जाता, यह खासतौर पर भारतीयों के लिए बनाए गए हैं।

यही नहीं, नेपाल के सीमावर्ती शहरों में मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है। बढ़नी कस्बे में स्मैक, चरस, गांजा, नशीली गोलियां और शराब का धंधा चरम पर है। नेपाली नंबर की मोटरसाइकिलों पर सवार तस्कर खुलेआम ड्रग्स बेच रहे हैं। इससे युवा पीढ़ी तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रही है।
नशे के बढ़ते प्रकोप से अपराधों में भी इजाफा हो रहा है। स्मैक व शराब के लिए युवा अपने ही परिवार पर हिंसा करने से नहीं चूकते। फैशन, फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव ने भी युवाओं को बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाई है।

इस विकराल समस्या से निपटने के लिए सरकार, समाज और अभिभावकों को मिलकर काम करना होगा। बच्चों में नैतिक शिक्षा, खेल और अच्छे संस्कारों को बढ़ावा देना ही नशे के जाल से बचाव का उपाय है। तभी देश का भविष्य सुरक्षित और उज्जवल रह पाएगा।

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