"मिसाइल मैन" की अंतिम उड़ान: डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को याद करते हुए


27 जुलाई 2015
, देश के इतिहास का वह दिन, जब भारत ने अपने सबसे प्रेरणादायक सपूत, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को खो दिया। वह न केवल एक महान वैज्ञानिक और भारत के 11वें राष्ट्रपति थे, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत भी थे। उसी दिन शिलॉंग में IIM में लेक्चर देते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली।

अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम का जीवन संघर्ष, समर्पण और सादगी की मिसाल है। तमिलनाडु के छोटे से गांव रामेश्वरम में एक मछुआरे के घर जन्मे कलाम के घर में बिजली तक नहीं थी। दीये की रोशनी में पढ़ाई करने वाले कलाम हर सुबह 4 बजे उठकर गणित सीखने जाते, क्योंकि एक शिक्षक हर साल केवल पांच बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते थे। पढ़ाई के बाद वह नमाज अदा करते और फिर रेलवे स्टेशन तथा बस अड्डे पर जाकर अखबार इकट्ठा कर शहर में बेचते। आत्मनिर्भरता उन्हें बचपन से विरासत में मिली थी।

विज्ञान में नए आयाम

1962 में डॉ. कलाम ISRO से जुड़े और भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान विकसित किया। उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों को भारत में विकसित कर ‘मिसाइल मैन’ की उपाधि पाई। 1999 में पोखरण परमाणु परीक्षण के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई, जिससे भारत परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बना।

जननेता और जनप्रिय राष्ट्रपति

2002 में जब वाजपेयी सरकार के पास राष्ट्रपति चुनने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं था, तब समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने अब्दुल कलाम का नाम आगे किया, जिसे सभी दलों का समर्थन मिला। वह देश के 11वें राष्ट्रपति बने और आम जनता के दिलों में बस गए। पांच साल के कार्यकाल के बाद जब वह राष्ट्रपति भवन से विदा हुए, तो उनके पास केवल एक सूटकेस था।

सच्चाई और सादगी की मिसाल

कलाम की ईमानदारी का एक उदाहरण मई 2006 का है, जब उनका पूरा परिवार दिल्ली आया। राष्ट्रपति भवन में 8 दिन तक 52 सदस्य रुके। कलाम ने उनका पूरा खर्च अपनी जेब से दिया—यहाँ तक कि एक-एक चाय का भी हिसाब रखा। बाद में उन्होंने ₹3,52,000 का चेक राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा।


आज, उनकी पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
डॉ. कलाम न केवल विज्ञान के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाले युगपुरुष थे, बल्कि वह एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने सादगी, सेवा और स्वाभिमान के नए मानक स्थापित किए।

"सपने वो नहीं जो हम नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें नींद नहीं आने देते।" – डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

भारत रत्न डॉ. कलाम को विनम्र श्रद्धांजलि।

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