काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी पर लखनऊ में भव्य मुशायरा व कवि सम्मेलनफ़ख़रुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी, उ.प्र. सरकार के तत्वावधान में आयोजन
लखनऊ, 14 जुलाई
फ़ख़रुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से उर्दू अकादमी प्रेक्षागृह, लखनऊ में काकोरी ट्रेन एक्शन की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक भव्य मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम बनकर उभरा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसने वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. मसीहुद्दीन ख़ान (लाइब्रेरियन, मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, लखनऊ कैंपस) ने किया, जबकि मुशायरे का संचालन मशहूर शायर शहबाज़ तालिब ने किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय सूचना आयुक्त श्री मोहम्मद नदीम ने आयोजन को संबोधित किया।
अध्यक्षता इंटेग्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अकील अहमद ने की।
विशिष्ट अतिथियों में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री कुंवर बासित अली तथा वरिष्ठ साहित्यकार व ‘राष्ट्रीय सहारा’ के संपादक डॉ. हिमायत जायसी (जिनकी पुस्तक का लोकार्पण भी इसी अवसर पर हुआ) शामिल रहे।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, समाजसेवियों व प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
सम्मानित अतिथियों में शामिल रहे:
डॉ. सुबहान आलम (प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय)
प्रो. डॉ. शीबा क़मर, प्रो. डॉ. मामून रशीद (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी)
डॉ. हारून रशीद (ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय)
डॉ. राजकमल गुप्ता (किसान पी.जी. कॉलेज, बहराइच)
प्रो. डॉ. नीरज शुक्ला (KMC)
प्रो. डॉ. नुजहत फ़ातिमा (करामात हुसैन गर्ल्स पी.जी. कॉलेज)
डॉ. श्वेता मिश्रा, डॉ. सुधा मिश्रा (समाजसेविका)
सामाजिक सहभागिता में अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे:
श्री अखिलेश प्रताप सिंह चौहान, श्री मोहम्मद आलम, श्री सईद हाशमी, कारी मोहम्मद जमील, कारी शरीफुल हसन, डॉ. शादाब आलम, मोहम्मद साद, ज़ैनब सिद्दीक़ी और डॉ. तौसीफ अहमद।
मुशायरा और कवि सम्मेलन में देश भर से आए नामचीन शायरों और कवियों ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना की अलख जगाई। श्रोताओं की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और अत्यंत सफल बना दिया।
कार्यक्रम संयोजक मंडल की ओर से सभी अतिथियों, विद्वानों, साहित्यकारों, समाजसेवियों और श्रोताओं का हृदयतल से आभार व्यक्त किया गया।