ईदुज़् ज़ुहा आज्ञा पालन और निष्कलंक भक्ति की अमर निशानी

ईदुज़् ज़ुहा  आज्ञा पालन और निष्कलंक भक्ति की अमर निशानी
जामिआ सिराजुल उलूम अलसल्लफ़िया, कृष्णा नगर, झंडा नगर के नाज़िमे आला हज़रत मौलाना शमीम अहमद नदवी हाफ़िज़हुल्लाह का उम्मत-ए-मुस्लिम के नाम रूहपरवर पैग़ाम
कृष्णानगर, झंडानगर (प्रतिनिधि):
जब क़ुर्बानी का जज़्बा बुलंदी पर होता है, जब इख़लास की ख़ुशबू फ़िज़ाओं में घुल जाती है, जब हज़रत इब्राहीम (अलै.) की वफ़ा और हज़रत इस्माईल (अलै.) की रज़ा का नज़ारा दिलों को झिंझोड़ता है  तब ईदुज़् ज़ुहा आती है, अपने साथ रब की रज़ा के लिए सब कुछ निछावर कर देने का पैग़ाम लेकर।
इसी रूहानी और ईमानी माहौल में जामिआ सिराजुल उलूम अलसल्लफ़िया, कृष्णा नगर, झंडा नगर के नाज़िमे आला, तज़किया और इख़लास के प्रतीक, इल्म और हिकमत के रहनुमा, हज़रत मौलाना शमीम अहमद नदवी हाफ़िज़हुल्लाह ने ईदुज़् ज़ुहा 2025 के मुबारक मौके पर पूरी उम्मत-ए-मुस्लिम को दिल की गहराइयों से मुबारकबाद पेश की।
उन्होंने फ़रमाया:
"ईदुज़् ज़ुहा केवल जानवरों की कुर्बानी का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने नफ़्स, इच्छाओं, घमंड, द्वेष, ईर्ष्या, नफ़रत और दुनियावी लालच को अल्लाह की रज़ा के लिए कुर्बान करने का दिन है। हज़रत इब्राहीम (अलै.) और हज़रत इस्माईल (अलै.) ने जिस तरह अपनी सबसे प्रिय वस्तु को रब के हुक्म पर निछावर कर दिया, उसी भावना को हमें अपने जीवन का उसूल बनाना चाहिए।"
मौलाना नदवी हाफ़िज़हुल्लाह ने आगे कहा:
"आज की इंसानियत जिन फित्नों, डर, नफ़रत और बिखराव का सामना कर रही है, उसका समाधान केवल इसी में है कि हम कुर्बानी के असल पैग़ाम को अपनाएँ  अल्लाह के लिए जिएँ, अल्लाह के लिए दें और अल्लाह ही के लिए त्यागने का जज़्बा पैदा करें।"
उन्होंने जामिआ के तमाम असातिज़ा, तलबा, संरक्षकों, शुभचिंतकों और तमाम ईमानवालों के लिए दुआ की:
"अल्लाह तआला सभी की कुर्बानियों को क़ुबूल फ़रमाए, हमें इख़लास, वफ़ा, सच्ची नीयत और नेक आमाल की दौलत अता फ़रमाए, और हमारे दिलों को तक़्वा, मोहब्बत और दीन-ए-हक़ की रौशनी से रौशन कर दे।"
अंत में हज़रत मौलाना ने पूरी उम्मत को यह संदेश दिया:
"आइए! इस ईद पर हम यह संकल्प करें कि हम न केवल जानवर की कुर्बानी करेंगे, बल्कि अपने नफ़्स, लालच, हसद और दुनिया की झूठी चमक-दमक को भी अल्लाह की राह में कुर्बान करेंगे। यही सच्ची कुर्बानी हमें रूहानी बुलंदी, ईमानी पाकीज़गी और हक़ीक़ी कामयाबी की ओर ले जाएगी।"
जामिआ सिराजुल उलूम अलसल्लफ़िया की ओर से ईदुज़् ज़ुहा की दिली और दुआओं भरी मुबारकबाद के साथ यह पैग़ाम उम्मत के हर शख़्स के लिए एक दावत-ए-फ़िक्र भी है और पैग़ाम-ए-अमल भी।

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