बकरीद: रूहानियत और क़ुर्बानी का महान पैग़ामआइशा सिद्दीक़ा गर्ल्स कॉलेज, कृष्णानगर के नाज़िम-ए-आला डॉ. मंज़ूर अहमद खान अलीग का उम्मत-ए-मुस्लिम के नाम प्रेरणादायक संदेश

बकरीद: रूहानियत और क़ुर्बानी का महान पैग़ाम
आइशा सिद्दीक़ा गर्ल्स कॉलेज, कृष्णानगर झंडानगर के नाज़िम-ए-आला डॉ. मंज़ूर अहमद खान अलीग का उम्मत-ए-मुस्लिम के नाम प्रेरणादायक संदेश

कृष्णानगर:
ईद उल अज़हा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान, परहेज़गारी, भाईचारे और अल्लाह की फरमाबरदारी का वह पाक अवसर है जो पूरी उम्मत-ए-मुस्लिम को हज़रत इब्राहीम (अ.स.) और हज़रत इस्माईल (अ.स.) की बेहतरीन कुर्बानी की याद दिलाता है।
इसी पाक मौके पर, आइशा सिद्दीक़ा गर्ल्स कॉलेज, कृष्णा झंडानगर के नाज़िम-ए-आला, जाने-माने शिक्षाविद्, चिंतक और क़ौम के सच्चे हमदर्द डॉ. मंज़ूर अहमद खान अलीग ने पूरी उम्मत को दिल से मुबारकबाद देते हुए एक प्रेरणादायक और प्रभावशाली संदेश जारी किया है।
अपने संदेश में डॉ. मंज़ूर अहमद खान ने कहा:
“ईद उल अज़हा सिर्फ़ जानवरों की कुर्बानी का दिन नहीं, बल्कि यह अपनेt नफ़्स, ख्वाहिशों, घमंड, लालच, हसद और दुनियावी मोहब्बतों को अल्लाह की रज़ा के लिए कुर्बान करने का वह पाक मौका है। हज़रत इब्राहीम (अ.स.) और हज़रत इस्माईल (अ.स.) ने जिस सच्चे जज़्बे और इख़लास से अपनी सबसे प्यारी चीज़ को रब के हुक्म पर निछावर किया, वही जज़्बा हमारी ज़िन्दगी में भी समाना चाहिए।”
डॉ. साहब ने आगे कहा:
“आज की दुनिया फितना, नफ़रत, तफ़रका और नैतिक पतन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। इसका असली इलाज यही है कि हम कुर्बानी के असली पैग़ाम को अपनाएं, अपने आचरण में इख़लास, परहेज़गारी और त्याग को जगह दें, और हर काम को सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए करें।”
आइशा सिद्दीक़ा कॉलेज के शिक्षकों, छात्राओं और अभिभावकों के साथ-साथ पूरी अहले ईमान के लिए दुआ करते हुए उन्होंने प्रार्थना की:
“अल्लाह तआला हम सभी की कुर्बानियों को क़ुबूल फरमाए, हमें सच्चाई, वफ़ादारी, सब्र, इख़लास और कुर्बानी के जज़्बे से नवाज़े, और हमारी ज़िन्दगी को अपनी रज़ा का आईना बना दे।”
अपने संदेश के अंत में डॉ. मंज़ूर अहमद खान ने उम्मत-ए-इस्लाम से अपील की:
“आइए! इस ईद के मौके पर न केवल जानवरों की बल्कि अपने नफ़्स, घमंड, लालच, हसद और दुनियावी मोहब्बतों की भी कुर्बानी देकर अल्लाह की रज़ा हासिल करने का पक्का इरादा करें। यही असली कुर्बानी हमें रूहानी बुलंदी, ईमानी पाकीज़गी और हमेशा की कामयाबी से नवाज़ेगी।”
आइशा सिद्दीक़ा गर्ल्स कॉलेज की ओर से यह संदेश केवल मुबारकबाद नहीं, बल्कि पूरी उम्मत के लिए सोचने और अमल करने की एक दावत भी है।

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