योग के अनुकरण से समाज से वैमनस्य और भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है

गुरु जी की कलम से 


21 जून को विश्व भर में 'योगा फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ' थीम के साथ मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को स्वास्थ्य, कल्याण और शांति के लिये योग के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु मनाया जाता है।इसका उद्देश्य शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, है योग को भारत की प्राचीन परंपरा के उपहार के रूप में प्रचारित करना तथा इसके अभ्यास के माध्यम से वैश्विक समरसता एवं शांति को प्रोत्साहित करना है।

 भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र (2014) में रखा गया था, जिसके परिणामस्वरूप 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) घोषित किया गया पहला योग दिवस वर्ष 2015 में मनाया गया था, जिसकी थीम थी: " (सामंजस्य और शांति के लिये योग)

आखिर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस क्यों मनाया जाता है क्योंकि यह ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) के साथ संयोग रखता है — यह उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है, जब सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं। यह दिन अधिकतम प्रकाश लाता है और योग परंपराओं में इसे आध्यात्मिक जागरण के संक्रमण काल के रूप में माना जाता

।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने योग को मानसिक और शारीरिक कल्याण और गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) से निपटने के एक प्रभावी साधन के रूप में मान्यता दी है तथा इसे अपने वैश्विक कार्य योजना (2018–30) में शामिल किया है।वर्ष 2015 में भारत के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय ने योग को एक 'प्राथमिकता' खेल अनुशासन के रूप में वर्गीकृत किया।योग शब्द संस्कृत के "युज" (एकजुट होना) से लिया गया है, जो मन और शरीर के सामंजस्य का प्रतीक है।इसका प्रमाण मुहरों (पशुपति मुहर पर योग मुद्रा) और जीवाश्मों के माध्यम से सिंधु घाटी सभ्यता में तथा उल्लेख वेदों में भी मिलता है साथ ही इसे पतंजलि के योगसूत्र (दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व) में व्यवस्थित रूप से संकलित किया गया था योग भारतीय दर्शन के षड्दर्शन परंपरा (न्याय, वैशेषिक, सांख्य, मीमांसा, वेदांत के साथ) में से एक है। आधुनिक प्रासंगिकता: योग समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, क्योंकि यह शारीरिक लचीलापन, मानसिक स्पष्टता तथा तनाव से राहत प्रदान करता है। कोविड-19 के दौरान मानसिक-सामाजिक पुनर्वास के एक साधन के रूप में इसका उपयोग किया गया। यह आज वैश्विक स्तर पर हठ योग, अष्टांग योग, और अयंगार योग जैसे रूपों में अत्यंत लोकप्रिय है व्यापक रूप से पतंजलि औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते हैं। पतंजलि के योग, बुद्धि नियंत्रण के लिए एक प्रणाली है, जिसे राजयोग के रूप में जाना जाता है। पतंजलि के अनुसार योग के 8 सूत्र बताए गए हैं, जो निम्न प्रकार से हैं - 

 
1 यम - इसके अंतर्गत सत्य बोलना, अहिंसा, लोभ न करना, विषयासक्ति न होना और स्वार्थी न होना शामिल है।
2 नियम - इसके अंतर्गत पवित्रता, संतुष्ट‍ि, तपस्या, अध्ययन, और ईश्वर को आत्मसमर्पण शामिल हैं।
3 आसन - इसमें बैठने का आसन महत्वपूर्ण है 
4 प्राणायाम - सांस को लेना, छोड़ना और स्थगित रखना इसमें अहम है।
5 प्रत्याहार - बाहरी वस्तुओं से, भावना अंगों से प्रत्याहार। 
6 धारणा - इसमें एकाग्रता अर्थात एक ही लक्ष्य पर ध्यान लगाना महत्वपूर्ण है।
7 ध्यान - ध्यान की वस्तु की प्रकृति का गहन चिंतन इसमें शामिल है।
8 समाधि - इसमें ध्यान की वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना शामिल है। इसके दो प्रकार हैं- सविकल्प और अविकल्प। अविकल्प में संसार में वापस आने का कोई मार्ग नहीं होता। अत: यह योग पद्धति की चरम अवस्था है।  
 
भगवद्‍गीता में योग के जो तीन प्रमुख प्रकार बताए गए हैं वे निम्न हैं- 
 
1 कर्मयोग- इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है।
 
2 भक्ति योग- इसमें भगवत कीर्तन प्रमुख है। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है।
 
3 ज्ञान योग- इसमें ज्ञान प्राप्त करना अर्थात ज्ञानार्जन करना शामिल है।

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