भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व पीएम माधव कुमार नेपाल की सांसदी गई
माधव कुमार नेपाल ने कहा सरकार की तरफ से उनके खिलाफ यह साज़िश है
काठमांडू।(परमात्मा उपाध्याय)
नेपाल की राजनीति के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार का औपचारिक मामला दर्ज हुआ है। यह मामला पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के खिलाफ दर्ज किया गया है, जो वर्तमान में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ( समाजवादी) के अध्यक्ष हैं। अनुसंधान आयोग ने उनके ऊपर जमीन के गैरकानूनी लेन-देन के गंभीर आरोप लगाते हुए विशेष अदालत में कार्रवाई की है। मामला दर्ज होने के बाद उनकी संसदीय सदस्यता भी स्वतः निलंबित हो चुकी है।
यह मामला भारत की संस्था पतंजलि योग पीठ से जुड़ी एक भूमि संबंधी घटना से है। बताया गया है कि कावेरी जिले में आयुर्वेदिक शिक्षा, उपचार और जड़ी-बूटी की खेती के नाम पर पतंजलि को भारी सब्सिडी पर 815 करोड़ रूपए की जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, जबकि यह छूट केवल उत्पादन उद्योगों के लिए ही है। इसके अलावा, जमीन की बिक्री कानूनी तौर पर प्रतिबंधित थी, लेकिन उस समय की कैबिनेट, जिसका नेतृत्व माधव कुमार नेपाल कर रहे थे, ने न केवल खरीद की अनुमति दी बल्कि बाद में उस जमीन की बिक्री को भी मंजूरी दे दी।
अनुसंधान आयोग का मानना है कि छूट के आधार पर प्राप्त जमीन को लाभ के लिए बेचना स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है, और सरकार की मंजूरी देना अधिकारों का खुला दुरपयोग है। नेपाल में यह पहली बार है जब किसी कैबिनेट के सामूहिक फैसले को भी भ्रष्टाचार के दायरे में लेकर कानूनी कार्रवाई की जा गई है।
इन आरोपों के जवाब में माधव कुमार नेपाल का कहना है कि यह सब उनके राजनीतिक कैरियर को खत्म करने की एक साजिश है, जिसके पीछे प्रधानमंत्री और सीपीएन यूएमएल के अध्यक्ष के पी शर्मा ओली का हाथ है। उनके अनुसार, ओली पहले भी कई बार इस तरह की कोशिशें कर चुके हैं, और अब व्यक्तिगत बदले की भावना से उन पर यह एक और कानूनी हमला है। उनका कहना है "मेरी कभी भी भ्रष्टाचार की मंशा नहीं रही, न ही मैंने इसके लिए किसी को आदेश दिया। यह सब मेरे राजनीतिक अंत की एक संगठित कोशिश है।" उन्होंने यह भी कहा कि पतंजलि जैसी संस्था में इस तरह की अनियमितता होगी, यह मेरे विचार में भी नहीं था।
नेपाल की राजनीतिक इतिहास में यह घटना केवल एक न्यायिक कदम नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और कानून की सर्वोच्चता की एक कसौटी भी है।
सवाल यह नहीं है कि अपराधी कौन है, सवाल यह है कि आने वाले दिनों में इस मामले में न्याय कैसे और किस नीयत से तय होगा। नेपाल के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक संस्कार पर सवाल खड़ा करने वाला है।