जनता पस्त दलाल मस्त, 21वीं सदी के इस चका चौंध जिंदगी में समान वेषभूषा धारी लोगों को देखकर यह पता लगाना कि वह नेता जनसेवक दलाल ठेकेदार इनमें से कौन है यह आसान नहीं है
21वीं सदी के इस चका चौंध जिंदगी में समान वेषभूषा धारी लोगों को देखकर यह पता लगाना कि वह नेता जनसेवक दलाल ठेकेदार इनमें से कौन है यह आसान नहीं है
गुरु जी की कलम से
बढ़नी, सिद्धार्थनगर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी बाहर बोर्ड लगा हुआ है कि दलालों का प्रवेश वर्जित है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढनी सिद्धार्थनगर पर दलाल सक्रिय होने का आरोप लगाते हुए शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनय वर्मा ने मुख्य चिकित्साधिकारी सिद्धार्थनगर को शिकायती पत्र भेजा था जिस पर चिकित्सा अधिकारी ने अस्पताल पर दलालों का प्रवेश वर्जित पेन्ट से लिखवा दिया है।
बताया जाता है कि कुछ लोग अस्पताल में उपलब्ध औषधि की जगह पर सेटिंग की बाहरी दवा लिखकर मरीजों का शोषण एवं भारी धनउगाही कर रहे है। इस प्रकार की शिकायत शोहरत रतगढ़ के विधायक विनय वर्मा के पास पहुंचने के बद, उनके निर्देश पर"दलालों का प्रवेश वर्जित" अस्पताल की दीवार पर वाल राइटिंग कराया गया है
जनता का कहना है कि इस प्रकार के
वाल राइटिंग से अस्पताल में दलाली रुक जाएगी लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में दलाली को रोकनी हीं है तो इसके लिए अस्पताल प्रशासन की भूमिका की भी
जांच शासन एवं प्रशासन में बैठे लोगों द्वारा जरूरी है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाउंड्री वॉल के बगल के मेडिकल स्टोरों एवं जांच केंद्रों पर लागू शसनादेश को क्यों नहीं माना जा रहा है बताया जाता है कि सरकारी अस्पताल से लगभग 100 मी से 200 मीटर की दूरी पर दवाएं की दुकान होनी चाहिए लेकिन यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी पर देखा जाए तो विभाग के कुछ लोगों के रहमो करम से अस्पताल परिसर से सटे ही लगभग आधा दर्जन प्राइवेट दावाओ की दुकानें है जो सरकार के मनसा का जहां माहौल उड़ाती हैं वही इस मुद्दे पर जन प्रतिनिधियों की चुप्पी समाज एवं जनता में अलग ही संदेश दे रही है
यही नहीं थाना ढेबरूआ पर भी बोर्ड लगा हुआ है कि दलालों का प्रवेश वर्जित है इस प्रकार सरकारी कार्यालय भवनो के साथ जगह-जगह पर दलाल प्रवेश वर्जित का बोर्ड लगा हुआ है
इस समय लोग इस बात के लिए काफी परेशान है कि आखिर दलाल कौन है दलालों की खोज कैसे की जाए जनता बोर्ड लगाए हुए अधिकारियों से इस बात की जानकारी जानना चाहती है
कि कम से कम यह बात तो बता दें कि दलालों की परिभाषा क्या है दलालों का वेश-भूषा क्या होता है दलालों का रहन-सहन कैसा है ताकि जनता दूर से ही देखकर के पहचान जाए कि यह लोग दलाल हैं और यही नहीं दलालों की जानकारी मिलने पर अधिकारी भी जान जाएगा की अमुक व्यक्ति दलाल है इसलिए वह भी ऐसे व्यक्तियों का अपनी कार्यालय एवं कार्यालय परिसर में प्रवेश वर्जित कर देगा जनता भी इन दलालों से दूर रहेगी लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि दलाल कौन है इस बात की जानकारी कैसे प्राप्त किया जाए
कुछ लोगों का कहना है कि कुछ सफेदपोश जो अपने कुकर्मों को छुपाने के लिए नेतागिरी का लबादा ओढ़कर के घूम रहे हैं कहीं वहीं लोगों को तो सरकार दलाल नहीं मान रही है
कुछ अपने पुराने इतिहास को छुपाने के लिए जो तरह-तरह दिखावा यएवं हथकनडा अपनाए हुए हैं यही लोग तो दलालों की श्रेणी में नहीं आते अथवा ऐसे लोग जो विभिन्न सरकारी कार्यालय में डॉक्टर अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों के बीच बिना किसी प्रत्यक्ष काम के बैठे रहते हैं जबकि प्रत्यक्ष रूप से उनका उस कार्यालय डॉक्टर अधिकारी कर्मचारी अथवा विभाग से कोई ना सरोकार होता है ना कोई कारोबार होता यह लोग तो दलालों की श्रेणी में नहीं आते हैं
एक व्यक्ति ने इस बात को बताया कि जब कोई भी काम जो कानून से किया जाता है और वही काम जब कानून को दरकिनार कर किया जाता है वह जाहिर सी बात है किसी न किसी दलाल की मिली भगत से ही होता है।