नेपाल में 136वाँ अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस: श्रमिकों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की पुकार
काठमांडू, 1 मई – आज नेपाल सहित विश्वभर में 136वाँ अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस विविध कार्यक्रमों, रैलियों और संगोष्ठियों के साथ मनाया गया। यह दिवस केवल एक रस्म अदायगी नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग के संघर्ष, बलिदान और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन चुका है।
इतिहास की गूंज और वर्तमान की चुनौती
1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो शहर से शुरू हुए श्रमिक आंदोलन की स्मृति में यह दिन मनाया जाता है। “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन” की माँग को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन में कई मजदूरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। इसी ऐतिहासिक घटना के सम्मान में आज दुनियाभर में श्रमिकों के अधिकारों की बात की जाती है।
नेपाल में श्रमिक आंदोलन का सफर
नेपाल में श्रमिक चेतना की शुरुआत विक्रम संवत 2003 में विराटनगर से मानी जाती है। विक्रम 2007 और 2046 के राजनीतिक परिवर्तनों के बाद 1 मई को आधिकारिक अवकाश घोषित किया गया। विक्रम 2019 में नेपाल मजदूर संगठन द्वारा पहली बार औपचारिक आयोजन किया गया, जो पंचायती व्यवस्था के विरुद्ध आवाज़ का हिस्सा था।
तकनीकी युग में श्रमिक वर्ग की नई चुनौतियाँ
वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति, ऑटोमेशन और वैश्विक पूंजीवाद के चलते श्रमिकों को रोजगार की अनिश्चितता, कम वेतन, अस्वस्थ कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
नेपाल: वैश्विक श्रमिक आपूर्ति में अग्रणी
नेपाल विदेशों में श्रमिक भेजने वाले अग्रणी देशों में शामिल है। प्रवासी नेपाली श्रमिकों की मेहनत और कमाई न केवल उनके परिवारों की आजीविका है, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। सरकार से उनकी कल्याण के लिए और अधिक ठोस नीतियों की अपेक्षा की जा रही है।
इस्लाम में श्रमिक का सम्मान
इस्लामी शिक्षाओं में श्रमिक वर्ग को अत्यंत सम्मान प्राप्त है। पैग़म्बर मोहम्मद (सल्ल.) ने मज़दूर की मज़दूरी समय पर देने, उनके साथ समानता का व्यवहार करने और उनकी मदद करने की हिदायत दी है। यह दृष्टिकोण आज के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से मेल खाता है।
नीतिगत सुधारों की आवश्यकता
इस अवसर पर विशेषज्ञों और संगठनों ने नेपाल सरकार से अपील की है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण किया जाए, न्यूनतम वेतन की समीक्षा हो, और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ाया जाए। विकलांग, वृद्ध और विदेशों में कार्यरत श्रमिकों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय अपनाए जाने की माँग भी उठी है।
सरकार का सकारात्मक संकेत
इस वर्ष सरकार द्वारा श्रमिक दिवस पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम माना जा रहा है, जिससे श्रमिकों के अधिकारों के प्रति गंभीरता का संकेत मिलता है।
श्रमिक केवल अर्थव्यवस्था के संवाहक नहीं, बल्कि समाज की बुनियाद हैं। उनके अधिकारों की रक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल सरकार नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है।