कपिलवस्तु के बहादुरगंज में ऐतिहासिक जनसभा: माओवादी केंद्र को मिली बड़ी सियासी मज़बूती
कृष्णनगर, बहादुरगंज (विशेष रिपोर्ट): नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) द्वारा चलाए जा रहे तराई-मधेश हुलाकी जनजागरण अभियान के अंतर्गत कपिलवस्तु के बहादुरगंज में आयोजित एक ऐतिहासिक जनसभा ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल मचा दी। इस विशाल सभा में कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने माओवादी केंद्र की सदस्यता ग्रहण कर पार्टी को नई ताक़त प्रदान की।
सभा की शुरुआत पार्टी के वरिष्ठ सलाहकार एहसान अहमद ख़ान के भावुक स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ और नए सदस्यों का स्वागत करते हुए इस अवसर को “जनविश्वास की जीत” बताया।
सभा का संचालन स्थानीय अध्यक्ष विष्णु बलबासे ने जोश और गरिमा के साथ किया, जिससे पूरे कार्यक्रम में उत्साह बना रहा।
प्रचंड का तीखा हमला:
माओवादी केंद्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड' ने अपने ओजस्वी भाषण में सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
> “भ्रष्टाचारियों को हरगिज़ माफ़ नहीं किया जाएगा। यह सरकार भ्रष्टाचारियों की रक्षा के लिए बनी है। मैं जनता की अदालत से दोबारा सरफराज़ होकर लौटूंगा।”
उन्होंने विकास योजनाओं में दलालों की दखलंदाज़ी और किसानों की उपेक्षा पर भी चिंता जताई।
राजनीतिक हस्तियों का समर्थन:
इस जनसभा में नेपाल सोशलिस्ट पार्टी के नेता इलियास मुसलमान रईस शाह, नेपाली कांग्रेस के पूर्व वार्ड अध्यक्ष संजय गुप्ता, यूएमएल के वरिष्ठ नेता मुस्तफा नेता, और पूर्व अध्यक्ष मशग़ूल आलम सहित कई प्रभावशाली नेताओं ने माओवादी केंद्र में शामिल होने की घोषणा की।
मौलाना मशहूद ख़ान नेपाली का संदेश:
सभा के अंत में नगरपालिका इंचार्ज और प्रसिद्ध सामाजिक-धार्मिक नेता मौलाना मशहूद ख़ान नेपाली ने मीडिया से बातचीत में कहा,
> “यह काफ़िला राजनीति के सिंहासन का नहीं, मजलूमों की सेवा का पैग़ाम लेकर निकला है।”
उन्होंने इसे केवल दल परिवर्तन नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प के रूप में परिभाषित किया और सभी नए साथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
कार्यक्रम की सफलता में अहम भूमिका:
इस जनसभा की सफलता में जिला, प्रदेश और नगर स्तरीय नेताओं की अहम भूमिका रही। ख़ास तौर पर जावेद आलम ख़ान, तुफ़ैल आलम ख़ान, नूर मोहम्मद, और कैसर वली की मेहनत को विशेष रूप से सराहा गया।
यह जनसभा न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम रही, बल्कि इसने जनआंदोलन और जनसेवा की दिशा में एक नई उम्मीद की किरण भी जगाई।