नेपाल बीरगंज में धार्मिक जुलूस के दौरान हिंसा: शहर में दहशत, कर्फ्यू लगाया गया



बीरगंज, 12 अप्रैल — नेपाल के सीमावर्ती शहर बीरगंज में शुक्रवार को हनुमान जयंती के मौके पर निकली शोभायात्रा के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। छपकिया चौक पर शुरू हुई झड़प ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया, जिससे शहर में दहशत, तनाव और गहरी असुरक्षा का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शोभायात्रा के दौरान एक समुदाय पर पत्थरबाज़ी की गई, जिसके जवाब में जुलूस में शामिल कुछ युवकों ने उग्र प्रतिक्रिया दी। हालात तेजी से बिगड़े और दोनों पक्षों के बीच जमकर हिंसा हुई। इस दौरान कई दुकानों और वाहनों को आग लगा दी गई, जिसमें एक मुस्लिम समुदाय से संबंधित होटल विशेष रूप से क्षतिग्रस्त हुआ।

शहर बना जंग का मैदान

बीच सड़क पर जलती मोटरसाइकिलें, भागते लोग, सायरनों की आवाज़ और पुलिस की भारी मौजूदगी ने बीरगंज को किसी युद्धभूमि का दृश्य दे दिया। शहर के कई हिस्सों में तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। पुलिस और आम नागरिकों सहित कई लोग घायल हुए। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।
कर्फ्यू लागू, शहर सील

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने बीरगंज के चारों ओर कर्फ्यू लागू कर दिया। शुक्रवार शाम 6:30 बजे से शनिवार दोपहर 12 बजे तक कर्फ्यू प्रभावी रहा। शहर के प्रमुख इलाकों — भेड़ियाही चौक से सरसिया पुल तक, गंडक चौक से शंकराचार्य गेट तक — पूरी तरह सील कर दिए गए। सार्वजनिक आवाजाही और सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई।

मौलाना मशहूद ख़ान नेपाली की भावुक अपील

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय मदरसा संघ नेपाल के महासचिव मौलाना मशहूद ख़ान नेपाली ने कहा,
"हमारा देश मोहब्बत और इंसानियत की ज़मीन पर खड़ा है। किसी भी नागरिक को डर में जीने पर मजबूर करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय आत्मा को भी चोट पहुंचाता है। हमें नफरत नहीं, मोहब्बत और भाईचारे की संस्कृति को अपनाना होगा।"

शांति और एकता की अपील

प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अफवाहों से बचने, संयम बरतने और भाईचारे को बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया है। बीरगंज की जनता अब एकजुट होकर यह सवाल कर रही है — "क्या हम मिलकर एक ऐसा समाज बना सकते हैं, जहां हर नागरिक सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे?"

बीरगंज में हुई यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत करने की ज़रूरत है। आइए, हम सब मिलकर इस शहर को एक बार फिर से शांति, सौहार्द और विकास की मिसाल बनाएं — नफरत नहीं, मोहब्बत के साथ।

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