बढ़नी में धूमधाम से मनी बाबा साहब अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती, समाजिक एकता और जागरूकता का दिया संदेश
बढ़नी (सिद्धार्थनगर), 14 अप्रैल 2025: नगर पंचायत बढ़नी सहित आस-पास के ग्रामीण इलाकों में भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती एवं महात्मा ज्योतिबा राव फुले की 131वीं जयंती को बड़े ही उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रभात फेरी, शोभायात्रा, विचार गोष्ठी और श्रद्धांजलि समारोहों का आयोजन किया गया, जिसमें सर्व समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रभात फेरी और कार्यक्रम की भव्य शुरुआत:
समारोह की शुरुआत सुबह प्रभात फेरी से हुई, जो नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई मुख्य आयोजन स्थल पर संपन्न हुई। इसमें सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं और गणमान्य लोग शामिल हुए। फेरी के दौरान “जय भीम”, “जय फुले”, “संविधान जिंदाबाद” जैसे नारे गूंजते रहे, जिससे पूरे नगर का माहौल समरसता और राष्ट्रभक्ति के भाव से सराबोर हो उठा।
महापुरुषों को श्रद्धांजलि और विचार गोष्ठी:
मुख्य कार्यक्रम स्थल पर डॉ. अंबेडकर और महात्मा फुले के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इसके बाद आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन, संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक सुधार के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पूर्व विधायक चौधरी अमर सिंह ने कहा:
“बाबा साहब और महात्मा फुले केवल एक वर्ग नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने जो विचार दिए, वह आज के समय में और भी प्रासंगिक हैं। जब समाज शिक्षित होगा, तभी बाबा साहब के विकसित भारत का सपना साकार होगा।”
इंजीनियर जियाउल हक ने कहा:
“फुले और अंबेडकर के विचारों को अगर आज भी हम आत्मसात कर लें, तो समाज में व्याप्त असमानता, भेदभाव और नफरत को समाप्त किया जा सकता है।”
डॉ. अबुल कलाम और हारून रशीद ने अपने वक्तव्य में कहा:
“समाज में बढ़ रही नफरत और असहिष्णुता को खत्म कर हम संविधान की आत्मा को बचा सकते हैं। बाबा साहब ने जो संविधान दिया, वह सभी वर्गों के अधिकारों की गारंटी देता है। हमें इसे बचाने और इसके अनुसार चलने की जरूरत है।”
इनकी रही सराहनीय भूमिका:
इस आयोजन को सफल बनाने में राजेंद्र भारती, शिवचरण भारती, डॉ. तौसीफ अहमद, नसीम अहमद, पंकज चतुर्वेदी, सागर पाठक शान, डॉ. सोनकर, राधेश्याम प्रधान सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद:
पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कहीं कोई अव्यवस्था ना हो, इसके लिए नगर में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।
समाज में नया संकल्प और ऊर्जा:
इस आयोजन ने न केवल बाबा साहब और महात्मा फुले के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया, बल्कि लोगों को सामाजिक समानता, शिक्षा और संविधान की रक्षा के लिए एक नई ऊर्जा और संकल्प भी प्रदान किया।
बढ़नी में मनाया गया यह आयोजन महापुरुषों की स्मृति में एक श्रद्धांजलि ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, एकता और अधिकारों के लिए जन-जागरण का मंच बन गया। लोगों में खासा उत्साह दिखा और यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बना।