वर्षों से था ओली को अपदस्थ करने की साजिश



परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
राजशाही के समर्थन में प्रदर्शन आकस्मिक या स्वत: स्फूर्त नहीं हैं। काफी समय से पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र नेपाल के दूर-दराज के इलाकों का दौरा कर राजशाही की वापसी के लिए संभावनाएं टटोल रहे थे।
 जिन भी देशों में लोकतंत्र फला-फूला है, वहां लोक-हित को राजनीतिक पार्टियों ने सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। अलग-अलग विचारधारा के होने के बावजूद उन्होंने खुद को जनता की आशाओं और आकांक्षाओं से नहीं कटने दिया। लोकतंत्र को मजबूती देना राजनीतिक पार्टियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनता को केंद्र में रखकर पार्टियां शुचिता, सादगी और पारदर्शिता पर जितना जोर देती हैं, लोकतंत्र उतना मजबूत होता है। 
दुर्भाग्य से नेपाल की राजनीतिक पार्टियां जनता की इस कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। अगर वहां नेपाल में राजशाही की बहाली की मांग उठ रही है तो इसके लिए काफी हद तक पार्टियां भी जिम्मेदार हैं।
नेपाल में हिंसा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल प्रचंड ने भी कहा है कि जब लोकतंत्र समर्थक पार्टियां लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम हो जाती हैं तो राजशाही समर्थक सिर उठाने की कोशिश करते हैं। 
प्रचंड संसद में आरोप लगा चुके हैं कि मौजूदा के.पी. शर्मा ओली सरकार की अव्यवस्थाओं से परेशान लोग पूर्व नरेश की ओर देख रहे हैं। दूसरी तरफ ओली पूर्व नरेश को चुनौती दे चुके हैं कि अगर वे सत्ता में लौटने के इच्छुक हैं तो अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनाव लड़ लें। फिलहाल वक्त का तकाजा है कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से बचकर नेपाल की सभी पार्टियां देश में लोकतांत्रिक चेतना विकसित करने सफल होगी या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा 
 गत 28 मार्चको काठमांडू में ‌राजशाही की वापसी एवं और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद नेपाल की ओली सरकार ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को नजरबंद कर दिया काठमांडू में हुए नुकसान के लिए पूर्वनरेश से लगभग आठ लाख रुपया नेपाली वसूले जने का प्रयास किया जा रहा हैनेपाली लोगों द्वारा माना जा रहा है ओली सरकार जल्द ही पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह को गिरफ्तार भी कर सकती है.

नेपाल कीओली सरकार ने न सिर्फ पूर्व राजा को घर में नजर बंद किया है, बल्कि उनके पासपोर्ट को भी जप्त कर लिया है इसके साथ ही साथ उनकी सुरक्षा मैं भी कटौती किया है 

. नेपाल कीहालात शुक्रवार को उस वक्त बिगड़ गए थे, जब पुलिस के साथ झड़प के बाद प्रदर्शनकारियों ने कई इमारतों में आग लगा दी. प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि सड़कों पर नेपाली सेना को उतरना पड़ा.



शुक्रवार को काठमांडू में हुई हिंसक झड़प के बाद मिली जानकारी क अनुसार ओली सरकार ने

 तमाम प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया , साथ ही कैबिनेट बैठक के बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के साथ-साथ कई बड़े नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है.

राजशाही समर्थक स्वगत नेपाल, शेफर्ड लिम्बू और संतोष तामांग को भी हिंसा भड़काने के आरोप में हिरासत में लिये जाने का समाचारमिला है. राजा लाओआंदोलन के प्रमुख समन्वयक नवराज सुबेदी को घर में नजरबंद दिया गया है, जबकि मुख्य कमांडर दुर्गा प्रसाई की तलाश जारी है. 

शुक्रवार को हुई हिंसा में एक पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई और 30 लोगों से ज्यादा घायल हो गए जिनका उपचार चल रहा है 

. नेपाली प्रशासन के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने नौ सरकारी वाहन, छह निजी वाहन और 13 इमारतों को आग के हवाले कर दिया . कई रेस्तरां और सार्वजनिक स्थानों को भी प्रदर्शनकारियों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया, वहीं प्रदर्शनकारियों का दावा है कि ओली सरकार ने जानबूझकर प्रदर्शनकारियों को भड़काया और उनपर हवाई फायरिंग के साथ-साथ आंसू गैस के गोले दागे.

राजशाही समर्थक नेपाल में 1991 का संविधान फिर से लागू किए जाने . देश में संवैधानिक राजशाही दोबारा लागू करके राजशाही और संसदीय लोकतंत्र एक साथ होने की मांग कर रहे हैं नेपाल में पुराने कानूनों को वापस लाने जाए और नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र का स्थान दिये जानें की भी मांग कर रहे है

 नेपाल में साल 2008 तक एक संवैधानिक राजशाही थी, लेकिन माओवादी आंदोलन और लोकतांत्रिक बदलावों के चलते इसे एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित कर दिया गया. 16 साल पहले नेपाल दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था. 2008 तक ज्ञानेंद्र शाह नेपाल के राजा हुआ करते थे. लेकिन माओवादी आंदोलन के चलते ज्ञानेंद्र शाह को सिंहासन खाली करना पड़ा.



 इसी साल फरवरी में नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र राजनीतिक तौर पर बहुत सक्रिय हो गए उन्होंने कहा था, “समय आ गया है कि हम देश की रक्षा करने और राष्ट्रीय एकता लाने की जिम्मेदारी लें.” जिसके बाद उन्होंने कई राजनीति बयान दिया. कुछ ही दिन पहले जब नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह पोखरा प्रवास से काठमांडू लौटे थे तो उनके स्वागत में एयरपोर्ट पर हजारों लोगों की भीड़ जमा हुई 

वहां मौजूद लोगों ने नारा लगाया कि. , राजा का महल खाली करो, हमारे राजा आ रहे हैं’. दरअसल लोग नेपाल में बढ़ती महंगाई भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से परेशान हो चुके हैं नेपाली सूत्रों पर विश्वास किया जाए तो विगत 17 वर्षों में

 साल 2008 से नेपाल में तकरीबन 13 सरकारें बन चुकी 


नेपाल में राजशाही समर्थकों के आंदोलन के बीच सत्तारूढ़ दल के नेता योगेश भट्टराई ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की तुलना फ्रांस के लुई सोलहवें से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश करने वालों का की फ्रांस के लुइ सोलह वे जैसी‌ हालत होगी‌

नेपाल में राजशाही आंदोलन के बीच सिर तन से जुदा करने वाला ऐतिहासिक गिलोटिन हथियार की चर्चा जोरों पर चल रही है 

, सत्ताधारी दल सीपीएन-यूएमएल सचिव योगेश कुमार भट्टाराई ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को इसी पर लटकाने की चेतावनी दी है. भट्टराई का कहना है कि लोकतंत्र को खत्म करना अब आसान नहीं है

 योगेश भट्टराई को नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का करीबी माना जाता है. भट्टराई ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब ओली ने काठमांडू के तिनकुने में हिंसा के लिए ज्ञानेंद्र को जिम्मेदार ठहराया है.



नेपाल में राजशाही के समर्थन में आंदोलन करने वाले शमशेर राणा और उनके करीबियों के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है. राणा और उनके करीबियों पर देशद्रोह का मुकदमा लगाया है. नेपाल पुलिस का कहना है कि राजशाही का समर्थन करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा.

वहीं यूएमएल के नेता योगेश भट्टराई ने कहा है कि लुई 16वां की तरह ही ज्ञानेंद्र निरंकुश शासन चाहते हैं, लेकिन इतिहास बदल चुका है. नेपाल में अब निर्णय लेने का अधिकार लोकतांत्रिक सरकार के पास है.

योगेश भट्टराई के बयान के बाद कहा जा रहा है कि राजशाही आंदोलन को कुचलने के लिए नेपाल की सरकार इस तरह के हथियारों का प्रयोग कर सकती है. नेपाल में 17 साल बाद अचानक से राजशाही आंदोलन ने तूल पकड़ा है 

 
नेपाल में हिंसा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल प्रचंड ने भी कहा है कि जब लोकतंत्र समर्थक पार्टियां लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम हो जाती हैं तो राजशाही समर्थक सिर उठाने की कोशिश करते हैं। प्रचंड संसद में आरोप लगा चुके हैं कि मौजूदा के.पी. शर्मा ओली सरकार की अव्यवस्थाओं से परेशान लोग पूर्व नरेश की ओर देख रहे हैं। दूसरी तरफ ओली पूर्व नरेश को चुनौती दे चुके हैं कि अगर वे सत्ता में लौटने के इच्छुक हैं तो अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनाव लड़ लें। फिलहाल वक्त का तकाजा है कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से बचकर नेपाल की सभी पार्टियां देश में लोकतांत्रिक चेतना विकसित करने पर अपना ध्यान केन्द्रित करना ाहिए 
शुक्रवार को काठमांडू में हुई हिंसक झड़प के बाद ओली सरकार नेतमाम प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया , साथ ही कैबिनेट बैठक के बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के साथ-साथ कई बड़े नेताओं को हाउस अरेस्ट किया 

 नेपाल में साल 2008 तक एक संवैधानिक राजशाही थी, लेकिन माओवादी आंदोलन और लोकतांत्रिक बदलावों के चलते इसे एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित कर दिया गया. 16 साल पहले नेपाल दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था. 2008 तक ज्ञानेंद्र शाह नेपाल के राजा हुआ करते थे. लेकिन माओवादी आंदोलन के चलते ज्ञानेंद्र शाह को सिंहासन खाली करना पड़ा.

 नेपाल के इतिहास की बात की जाए तो एक ही राजपरिवार शाह वंश के सदस्यों का शासन रहा, जो कि खुद को प्राचीन भारत के राजपूतों का वंशज मानते थे. शाह वंश ने 1768 से साल 2008 तक 240 साल देश पर शासन किया. 2008 में राजशाही को खत्म कर दिया गया. जिसके बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को राजमहल खाली करने को कहा गया. राजमहल खाली करने के बाद कुछ समय के लिए वह नागार्जुन पैलेस में रहे और बाद में आम आदमी की तरह जीवन व्यतीत करने लगे.है 
योगेश भट्टराई को नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का करीबी माना जाता है. भट्टराई ने यह बयान ऐसे वक्त में दिया है, जब ओली ने काठमांडू के तिनकुने में हिंसा के लिए ज्ञानेंद्र को जिम्मेदार ठहराया ह।

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