सिद्धार्थनगर जनपद के विकास की बागडोर संभाले हुए हैं महिलाएं, 14 में 13 विकासखंडों में महिला ब्लॉक प्रमुख



           



सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश।
प्रदेश का सीमावर्ती जिला सिद्धार्थनगर इन दिनों विकास की नई इबारत लिख रहा है—और इसकी कमान संभाली है महिलाओं ने। जनपद में कुल 14 विकासखंड हैं, जिनमें से 13 में विकास कार्यों की जिम्मेदारी महिला ब्लॉक प्रमुखों के हाथ में है। यही नहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी महिला प्रतिनिधि काबिज हैं।

यह परिदृश्य न केवल जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त मिसाल भी पेश करता है। सिद्धार्थनगर की महिलाएं न सिर्फ अपने क्षेत्रों के विकास में सक्रिय हैं, बल्कि राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाती महिलाएं
विधानसभा डुमरियागंज से पूर्व विधायक स्व. तौफीक अहमद की पुत्री सैयदा खातून वर्तमान में विधायक हैं और जनता की आवाज को विधानसभा में बुलंद कर रही हैं।

इटवा ब्लॉक में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की पत्नी सूर्यमती देवी पांडेय ब्लॉक प्रमुख हैं, जबकि बांसी में पूर्व विधायक लालजी यादव की पत्नी नीलम यादव, बर्डपुर में पूर्व विधायक अमर सिंह की पत्नी शीष वंदना सिंह, और बढ़नी में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साधना चौधरी की बहू मिनाक्षी चौधरी ब्लॉक प्रमुख पद पर कार्यरत हैं।

सशक्त महिला नेतृत्व से सज्जित विकासखंड

नौगढ़: रेनू मिश्रा

जोगिया: सावित्री देवी

उसका बाजार: लीलावती देवी

खुनियांव: रीता देवी

डुमरियागंज: मांती त्रिपाठी

भनवापुर: शशिकला ओझा

शोहरतगढ़: प्रीति यादव

खेसरहा: पुष्पा देवी

मिठवल: निशा चौधरी


जिला पंचायत में भी महिला का कब्जा
जिले की जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बस्ती मंडल के प्रमुख ठेकेदार उपेंद्र सिंह की पत्नी शीतल सिंह विराजमान हैं, जो जनपदभर में विकास कार्यों का संचालन कर रही हैं।

महिला नेतृत्व से बढ़ रहा जिले का गौरव
ये सभी महिला जनप्रतिनिधि न केवल अपने क्षेत्रों में विकास की गंगा बहा रही हैं, बल्कि सिद्धार्थनगर को विश्व मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाने के लिए भी प्रयासरत हैं। इनकी सक्रियता से प्रेरित होकर अन्य महिलाएं भी राजनीति में उतरने को तत्पर हैं।

निष्कर्षतः, नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जनपद ने यह सिद्ध कर दिया है कि महिला नेतृत्व से न सिर्फ सामाजिक बदलाव संभव है, बल्कि विकास की गति भी द्रुत होती है। यह जनपद आज उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।



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