दरबार नरसंहार की जांच को आयोग गठन की मांग क्यों कर रहे, प्रचंड
परमात्मा उपाध्याय
काठमांडू, नेपाल
ढाई दशक पूर्व हुए राजा वीरेंद्र सहित उनके पूरे परिवार की हत्या के मामले की जांच के लिए आयोग गठन की मांग प्रचंड द्वारा की जा रही है।
लेकिन जो मांग प्रचंड अब कर रहे हैं, इसकी जरूरत तब क्यों नहीं महसूस हुई जब वे स्वयं नेपाल के पीएम होते रहे? प्रचंड के अब इस मांग पर आम धारणा यह है कि यह पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र पर कानूनी शिकंजा कसने की कोशिश है।
नेपाल के शाही परिवार की हत्याकांड के पीछे का सच. 23 साल बाद भी अनसुलझा रहस्य बना हुआ है शाही परिवार के हत्याकांड के पीछे की वजह पर लोग तरह-तरह के कयास लगा ते रहे हैं
कुछ लोग इसके पीछे राजकुमार दीपेंद्र की शादी की कहानी बताते हुए कहते हैं कि राजकुमार दीपेंद्र को उनकी मां यानी रानी ऐश्वर्या ने शादी के बारे में बात करने के लिए एक बार बुलाया. रानी प्रिंस की शादी के लिए दुल्हन का चुनाव कर रही थीं
.उधर राजकुमार दीपेंद्र अपनी मर्ज़ी की लड़की से शादी करना चाहते थे, जब इस बात की जानकारी रानी ऐश्वर्या को हुई तो एक पल के लिए ऐश्वर्या का माथा ठनक गया. ऐश्वर्या ने लड़की के बारे में जब राजकुमार से पूछा तो प्रिंस ने कहा कि वह शादी तो देवयानी से ही करेगा कुछ वक्त के बद
रानी ऐश्वर्या ने कहा की शादी के लिए मैंने जिस लड़की का चुना है वह राजमाता की बहन के खानदान की है यानी राज घराने की है ईस घर में कोई दुल्हन आएगी तो प्रतिष्ठितश
इधर, दीपेंद्र और देवयानी दोनों को उम्मीद थी कि शादी की संभावना खत्म नहीं हुई. इस बीच, दीपेंद्र ने अपने देश नेपाल के सुरक्षा विभाग के लिए हथियारों और अन्य उपकरणों की एक डील का प्रस्ताव रखा और अपना सुझाव भी. दिया दीपेंद्र के इस प्रस्ताव को दीपेंद्र के पिता नेपाल के राजा बीरेंद्र ने दरकिनार करते हुए इससे उलट अपने फैसले को तरजीह दिया जिससे. दीपेंद्र को यहां भी मायूसी हाथ लगी.
एक दिन दीपेंद् के जिद के कारण ऐश्वर्या ने दोनों की कुंडलियों का मिलान करवाया तो एक ज्योतिषी का कहना था कि अगर प्रिंस दीपेंद्र 35 साल की उम्र से पहले पिता बनेंगे तो महाराज की मृत्यु तक हो सकती है.
दीपेंद्र और देवयानी का रिश्ता कायम था एक दिन ऐश्वर्या ने साफ कह दिया कि देवयानी जिस सिंधिया खानदान से है, वो पुणे के पेशवाओं की नौकरी करते थे इसलिए वो शाही खानदान के मुकाबले कुछ नहीं हैं. दीपेंद्र ने कहा कि प्रिंस निरंजन की शादी तय करते वक्त तो यह नहीं सोचा गया था इस पर. ऐश्वर्या बिगड़ गईं और दीपेंद्र को तमीज़ से बात करने के लिए
साल 2001 में जून के महीने का पहला दिन था. दीपेंद्र हर तरफ से मायूस था और जल्द ही कोई फैसला चाहता था. इसी दिन राजमहल में फैमिली डिनर का आयोजन किया गया था
दीपेंद्र ने शाम से ही नशा करना शुरू कर दिया था और नशे से बेकाबू हो गया था. सबकी मौजूदगी में मां और पिता पर चीखा-चिल्लाया तो कुछ रिश्तेदार उसे कमरे में छोड़ आए. अपने कमरे में पहुंचने के बाद दीपेंद्र ने देवयानी से फोन पर बात की तो बस यही कहा कि अब वह सोने जा रहा है
दीपेंद्र कमरे से निकला तो आर्मी के जवान की तरह और घातक हथियारों से लैस होकर. फिर गैदरिंग हॉल में पहुंचकर धड़ाधड़ गोलियां बरसाते हुए दीपेंद्र ने अपने माता-पिता समेत राजपरिवार के नौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया और खुद को भी गोली मार लिया
नेपाल के प्रतिष्ठित घराने के पशुपति शमशेर जंग बहादुर राणा और उषा राजे सिंधिया की बेटी देवयानी को यह खबर मिली तो उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई. नरसंहार के अगले ही दिन देवयानी ने नेपाल छोड़ दिया और भारत चली आई.
अब जानिए कि इस नरसंहार से जुड़ी और कहानियां जो समय के साथ सामने आईं.
राजमहल में हुए नरसंहार के 8 साल बाद 2009 में तुल बहादुर शेरचरन सामने आया और उसने कहा कि उस हत्याकांड का ज़िम्मेदार वह था. एक रिपोर्टर के साथ मुलाकात में नाटकीय और संदेहास्पद ढंग से शेरचरन ने यह खुलासा किया था.
हत्याकांडके समय के नेपाल के विदेश मंत्री रहे चक्र बासटोला का कहना था कि हत्याकांड के पीछे पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला को भी मारने की साज़िश थी. चक्र के मुताबिक कोईराला की कार पर हमला हुआ था. चक्र ने इसे एक बड़ी साज़िश करार दिया था
पेशे से पत्रकार रहे कृष्णा अबिरल ने रक्तकुंड नामक उपन्यास लिखा. कृष्णा ने राजमहल की एक महिला कर्मचारी के साथ इंटरव्यू किए जो रानी की सेविका थी. इस उपन्यास में लिखा गया कि दीपेंद्र के भेस में दो नकाबपोश आदमियों ने गोलियां बरसाईं. ये दो नकाबपोश कौन थे? यह रहस्य अब तक सुलझा नहीं है.
नेपाल के तत्कालीन राजा बीरेंद्र के छोटे भाई ज्ञानेंद्र उस रात महल में मौजूद नहीं थे.
हत्याकांड में बीरेंद्र की तरफ के रिश्तेदार मारे गए लेकिन ज्ञानेंद्र की तरफ के रिश्तेदार बच गए. इसके बाद आरोप लगाया गया कि ज्ञानेंद्र राजा बनना चाहते थे और गद्दी हथियाने के लिए हो सकता है कि षडयंत्र उन्होंने ही रचा हो.
नेपाल नरेश बीरेंद्र की हत्या के नौ साल बाद नेपाल के पूर्व पैलेस मिलिट्री सेक्रेट्री जनरल बिबेक शाह ने एक किताब लिखी ‘माइले देखेको दरबार’ (राजमहल, जैसा मैंने देखा) और दावा किया कि निर्मम हत्याकांड के पीछे संभवतः भारत शाह का हाथ था.विवेक शाह के अलावा नेपाली नेता पुष्प कमल दहाल ने भी दावा किया था कि इस हत्याकांड की साज़िश रॉ ने रचीथी.
नारायणहिति राजमहल के परिसर में खतरनाक हथियारों से लैस सुरक्षा गार्ड बड़ी संख्या में मौजूद रहते थे. थ्योरी रही कि उनमें से कोई हत्याकांड के पीछे हो सकता था. इसके अलावा डॉक्टरों पर शक किया गया. सिर में गोली लगने के बाद प्रिंस दीपेंद्र 1 जून 2001 की रात से अस्पताल में तीन दिन कोमा में रहा. 3 दिन बाद मौत हुई लेकिन पोस्टमार्टम नहीं किया गया
शाही परिवार की हत्या के वक्त नेपाल राजपरिवार के प्रिंस पारस की भूमिका पर उंगली उठी थी. जब हादसा हुआ राजकुमार पारस शाही महल में मौजूद था लेकिन उसे खरोंच तक नहीं आई. पहले भी कई मामलों में बदनाम पारस के मिज़ाज, करतूतों और अतीत को देखकर पारस पर शक किया गया
. इनके अलावा एक और थ्योरी कुछ वक्त के लिए चर्चा में रही थी, सेल्फ बॉम्बिंग. कहा गया था कि इस हत्याकांड के पीछे मानव बम का धमाका हो सकता था. इन तमाम थ्योरीज़ के चलते सच का खुलासा नहींँ हुआ
. अलबत्ता कुछ सवाल ज़रूर खड़े होते रहे जैसे इस घटना के बाद भारत ने यह बयान क्यों दिया कि इस घटना में भारत की कोई साज़िश नहीं है? पूरी घटना के दौरान राजमहल के एडीसी अपने कमरे से बाहर क्यों नहीं निकले? नेपाल के राजमहल के सुरक्षाकर्मी गोलियां चलने की आवाज़ों के बावजूद वहां क्यों नहीं पहुंचे? और तमाम थ्योरीज़ पर क्या जांच हुई, क्या नतीजे निकले