जिस हाल में जीना मुश्किल हो, उस हाल में जीना लाज़िम है।
जिस हाल में जीना मुश्किल हो ।
उस हाल में जीना लाज़िम है।
आप जिस शख्स को नीचे फोटो में देख रहे है ,इनका नाम अनीक अहमद है ये ग्राम दुधवानिया बुजुर्ग बढ़नी सिद्धार्थनगर (UP) के रहने वाले है ,
इक दिन मेरा
दोस्त Adv मसरूर आलम मुझे अचानक बोलता है आओ तुम्हे इक जगह लेके चलते तो में उसके साथ चल जाता हूं जब में वहां पहुंचता हूं तो इक अलग नजर देखता हूं कि इक शख्स जिसकी उमर गुजर रही थी सिलाई करते हुए वो आज बकरा और गाय का पालन कर रहा है तब क्या था मेरे अंदर कुछ जानने और समझने की हलचल मचती है ,फिर में उनसे पूछने लगता हूं कि आप सिलाई को छोड़ कर इस फील्ड में कैसे आए ,तब वो बताते है कि सिलाई वाला काम अब एकदम कम होगया था क्योंकि रेडीमेड का जमाना है , मशीनें अब कंप्यूटराइज्ड होती चली जा रही थी तो हम जैसे छोटे कारीगरों का मार्केट में रहना मुश्किल हो रहा था तो मेरे पास पिता की दी हुई जमीन थी ,में इक दिन सोचा कि हाथ पैर बांध कर बैठने से काम तो होगा नहीं कुछ किया जाए और में किसानी से पहले ही जुड़ा था तब ये काम में स्टार्ट किया ,उसके बाद से जितना हमने इन्वेस्ट किया उससे ज्यादा हम निकाल चुके है,और अभी बकरा ईद भी आने वाला है उसमें भी और पैसा कमा लेंगे । मेरा इस स्टोरी को कवर करने का मकसद ये था कि अगर आप मार्केट को समझ रहे है तो आप को लोगो डिमांड के हिसाब से जंप करना चाहिए नहीं तो आप बैक होजाएंगे, जैसे आज कल इक बहस छिड़ी है कि A I के आने से जॉब चली जाएगी लेकिन मेरा मानना ये है कि जो I T वाले खुद को अपग्रेड करेंगे और मार्केट के हिसाब से स्किल लेंगे वो और आगे जाएंगे।
जिया