नेपाल को अंधेरे से रोशनी में लाने वाले कुलमान घिसिंग की बर्खास्तगी
काठमांडू: नेपाल की ऊर्जा क्रांति के अग्रणी नायक कुलमान घिसिंग को नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) के कार्यकारी निदेशक पद से हटाने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला न सिर्फ नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि उन लाखों नागरिकों की उम्मीदों पर भी कुठाराघात है जिन्होंने बिजली संकट से मुक्ति और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सपना देखा था।
कुलमान घिसिंग वही शख्स हैं जिन्होंने नेपाल को लोडशेडिंग के अंधेरे से निकालकर रोशनी में खड़ा किया और NEA जैसे घाटे में डूबे संस्थान को मुनाफे में बदला। उनकी दूरदर्शी नीतियों ने नेपाल को न केवल ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाया बल्कि बिजली का निर्यातक देश भी बना दिया। ऐसे प्रभावशाली नेतृत्व को पद से हटाना देश की ऊर्जा स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो सकता है।
कुलमान घिसिंग की ऐतिहासिक उपलब्धियां
लोडशेडिंग का अंत: जिस नेपाल में कभी 15 से 18 घंटे तक बिजली गुल रहती थी, वहां कुलमान घिसिंग ने लोडशेडिंग को पूरी तरह खत्म कर दिया। उन्होंने प्रभावी प्रबंधन और वितरण सुधारों के जरिए देश को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की नींव रखी।
99% आबादी तक बिजली पहुंचाई: जब उन्होंने पदभार संभाला, तब नेपाल की सिर्फ 58% जनता को बिजली की सुविधा थी। उनकी नीतियों ने इसे 99% तक बढ़ा दिया, जिससे लगभग हर घर रोशन हुआ।
घाटा खत्म कर प्राधिकरण को मुनाफे में बदला: NEA जो 35 अरब नेपाली रुपये के घाटे में था, उसे उन्होंने 47 अरब रुपये के मुनाफे में बदला।
नेपाल को बिजली निर्यातक बनाया: कभी विद्युत आयात करने वाला नेपाल अब बिजली निर्यात कर रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में 19 अरब नेपाली रुपये की बिजली का निर्यात किया गया।
हाइड्रोपावर और सौर ऊर्जा में क्रांति:
बिजली उत्पादन क्षमता: 856 मेगावाट से बढ़ाकर 3500 मेगावाट
नए परियोजनाएं: 11,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं को मंजूरी
सौर ऊर्जा: 150 मेगावाट उत्पादन चालू, 950 मेगावाट निर्माणाधीन
बिजली वितरण और बुनियादी ढांचे में सुधार:
ट्रांसमिशन लाइन का विस्तार: 1,21,000 से 2,20,000 सर्किट किलोमीटर तक
सब-स्टेशन क्षमता: 640 MVA से 3000 MVA तक बढ़ाई
काठमांडू व अन्य शहरों में अंडरग्राउंड केबल बिछाने की योजना
नेपाल के ऊर्जा भविष्य पर खतरा
कुलमान घिसिंग की बर्खास्तगी सिर्फ एक व्यक्ति को हटाने का मामला नहीं, बल्कि नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को खतरे में डालने का संकेत है। सवाल उठता है कि क्या नेपाल फिर से लोडशेडिंग के अंधकार में लौटेगा? क्या बिजली आयात करने की जरूरत फिर से पड़ेगी?
यदि एक ईमानदार, दूरदर्शी और सक्षम नेतृत्व को ऐसे ही हटाया जाता रहेगा, तो नेपाल का विकास यात्रा अधर में लटक सकता है। आज नेपाली जनता के मन में यही प्रश्न गूंज रहा है