राम मनोहरलोहिया की चौखंबा राज्य की अवधारणा
राम मनोहरलोहिया की चौखंबा राज्य की अवधारणा
उन्होंने अपनी चर्चित कृति 'समाजवादी नीति के विविध पक्ष' के अंतर्गत यह तर्क दिया कि समाज की संरचना में चार परतें पाई जाती हैं :
गाँव (Village), मंडल (District), प्रांत (Province) और राष्ट्र (Nation). यदि किसी भी राज्य का संगठन इन चारों पर्तों के अनुरूप किया जाए तो वह समुदाय का सच्चा प्रतिनिधि बन जाएगा. डॉक्टर राम मनोहर लोहिया का मानना था कि किसी भी राज्य के विकास के लिए राज्य में चार स्तंभों का निर्माण करना ही होगा.
इस व्यवस्था को लोहिया ने 'चौखम्बा राज्य' की संज्ञा दी है. उनका मानना था कि मकान की छत के स्थायित्व के लिए जिस प्रकार से चार खंबे मजबूत और सुदृढ़ होने चाहिए छत के चारो खम्बे अपना पृथक-पृथक अस्तित्व रखते हुए भी एक छत को संभालते हैं, वैसे ही यह व्यवस्था केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण की परस्पर विरोधी अवधारणाओं में सामंजस्य स्थापित करेगी. इस तरह प्रशासन के चार स्वायत अंग स्थापित किए जाने चाहिए गाँव, मंडल, प्रांत और केंद्रीय सरकार जो क्रित्यात्मक संघवाद (Functional Federalism) के अंतर्गत आपस में जुड़े होंगे.
प्रचलित व्यवस्था में से जिलाधीश का पद समाप्त कर देना होगा क्योंकि वह प्रशासनिक शक्ति के जमाव का प्रतीक है. पुलिस और कल्याणकारी कार्य गाँव और नगर की पंचायतों को संभालने होंगे. ग्राम प्रशासन छोटी-छोटी मशीनों पर आधारित कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देगा जो सहकारी संस्थाओं के रूप में संगठित होंगे. इससे आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण और बढती हुई बेरोजगारी को दूर किया जा सकेगा.